Sunday, October 24, 2021

इन आसान योग आसनों के जरिये घर बैठे बढ़ाएं ऑक्सीजन लेवल, जानिये क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

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Yoga Pranayam Exercise for Healthy Lungs: देश में कोविड-19 आपदा के संकट के बीच, ईशा फाउण्डेशन के संस्थापक सद्गुरु ने ऑक्सीजन स्तर को बढ़ाने और प्रतिरोध क्षमता को दृढ़ करने के लिए सरल योग अभ्यास बताए हैं। इस समय एक मजबूत इम्युन सिस्टम और अच्छी तरह काम करने वाले श्वसन तंत्र का होना महत्वपूर्ण है, क्योंकि कोविड से प्रभावित मध्यम और तीव्र लक्षणों वाले लोग सांस लेने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं।

सद्गुरु के यूट्यूब चैनेल पर साझा किए गए एक वीडियो में ईशा फाउण्डेशन के संस्थापक, ऑक्सीजन स्तर और इम्युन सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए, साष्टांग, मकरासन और सिम्ह क्रिया जैसे कुछ सरल योगाभ्यास सिखा रहे हैं।

साष्टांग एक ऐसा आसन या योग मुद्रा है जिसमें शरीर जमीन से आठ बिंदुओं पर संपर्क बनाकर संतुलित होता है। ‘इस आसन में शरीर का पूरा फेफड़ा तंत्र एक अनोखे तरीके से काम करता है… इस प्रक्रिया में माथा, सीना, दोनों हाथ, दोनों घुटने, और पैरों के अंगूठे जमीन को छूते हैं,’ सद्गुरु समझाते हैं। ‘अगर आप इसे दिन में 4-5 बार करते हैं तो आपका ऑक्सीजन स्तर यकीनन बढ़ जाएगा।’

इसके बाद सिम्ह क्रिया कीजिए ताकि आपका इम्युन सिस्टम बेहतर काम करे, आध्यात्मिक गुरु ने आगे बताया। सद्गुरु के अनुसार सिम्ह क्रिया आपके श्वसन तंत्र और इम्युन सिस्टम को मजबूत करती है, फेफड़ों की क्षमता को बढ़ाती है, और इंसान को मौजूदा संकट को सकारात्मक तरीके से संभालने के लिए तैयार करती है। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने हाल में अपने स्टाफ को ‘शक्तिशाली’ सिम्ह क्रिया करने की सलाह दी है।

इस तीन मिनट के योग अभ्यास को कोई भी कर सकता है, जिसमें गर्भवती महिलाएं और अस्थमा, माइग्रेन, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी पुरानी बीमारियों या मेडिकल दशाओं से पीड़ित लोग भी शामिल हैं।

मकरासन एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ मगरमच्छ का मुद्रा है। इस आसन को करते वक्त शांत अवस्था में जमीन पर लेटना होता है। इसमें आंखें बंद रखकर सांस लेना पड़ता है।

बाबा रामदेव के ये आसन भी हैं लाभकारी: बाबा रामदेव के अनुसार सूर्य नमस्कार, उष्ट्रासन, भुजंगासन, शलभासन, धनुरासन, मर्कटासन, पवनमुक्तासन, उत्तानपादासन, सेतुबंधासन, नौकासन और शीर्षासन जैसे योगासनों का अभ्यास करने से फेफड़े मजबूत रहते हैं। इसके अलावा, हलासन और सर्वांगासन, साथ ही कपालभाति, भ्रामरी, उज्जायी, भस्त्रिका और अनुलोम-विलोम जैसे प्राणायाम करने से सांस संबंधी दिक्कतें नहीं होंगी।



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