Sunday, October 24, 2021

जब अखिलेश की जिद के आगे मजबूर होकर शिवपाल यादव उन्हें ताजमहल दिखाने ले गए

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Akhilesh Yadav: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल यादव का रिश्ता आज भले ही नदी के दो किनारों जैसा दूर-दूर नजर आता हो, मगर एक वक्त ऐसा भी था, जब चाचा शिवपाल ने ऊंगली पकड़कर अखिलेश को जिंदगी की राह दिखाई थी। क्योंकि समाजवादी आंदोलन की वजह से नेताजी का ज्यादातर समय या तो आंदोलनों में बीतता या फिर जेल में।

एक इंटरव्यू के दौरान जब मुलायम सिंह यादव से उनकी ज़िंदगी के सबसे तकलीफदायक लम्हों के बारे में पूछा गया तो नेताजी ने आपातकाल के दिनों को याद करते हुए बताया कि “मेरा बेटा अखिलेश 3 साल का हो गया था, और वो अपने पिता से मिला भी नहीं था..क्योंकि मैं जेल में था…जिस समय बेटे को अपने पिता की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, सरकार ने इमरजेंसी की वजह से मुझे जेल में डाल दिया था…ये बात बेटे के लिए दुर्भाग्यपूर्ण तो थी ही, एक पिता के लिए भी तकलीफदायक थी…।”

पिता मुलायम, समाजवाद का झंडा बुलंद कर रहे थे, ऐसे में बेटे टीपू को संभालने का जिम्मा उठाया, नेताजी के छोटे भाई शिवपाल यादव ने। अखिलेश यादव जब छठवीं कक्षा में पहुंचे तो शिवपाल ने उनका दाखिला, धौलपुर के सैनिक स्कूल में करवा दिया, और खुद हर महीने जाकर उनका हालचाल जानने लगे।

एक इंटरव्यू के दौरान शिवपाल ने बताया था कि “टीपू जब सातवीं में पढ़ते थे, तब हम और हमारी पत्नी छुट्टियों के बाद उन्हें छोड़ने धौलपुर गए। अखिलेश ने तब चाचा-चाची से ताज महल देखने की जिद की और उस जिद के आगे झुकते हुए, हम सब पहले ताज महल देखने गए…।” नन्हें अखिलेश की चाचा के संग ताज महल देखने की वो तस्वीर आज भी यादव परिवार के एलबम में सुरक्षित रखी हुई है।

सैनिक स्कूल में अखिलेश का दाखिला करवाना भी कोई आसान काम नहीं था। क्योंकि उनकी अंग्रेजी अच्छी नहीं थी। ऐसे में शिवपाल और मुलायम ने उनकी इंग्लिश मजबूत करने पर खासा काम किया। अलग से टीचर लगाया गया और सबके सहयोग और कड़ी मेहनत के बात अखिलेश ने सैनिक स्कूल की परीक्षा में अंग्रेजी के सवालों का सही जवाब दिया और उन्हें मिलिट्री स्कूल में दाखिला मिल गया।

प्रवेश परीक्षा में टीपू से सवाल पूछा गया था कि हेलमेट का क्या काम है? इसके जवाब में अखिलेश ने कहा कि “ये शरीर की रक्षा के लिए जरूरी है, क्योंकि हेलमेट से हमारे दिमाग की हिफाजत होती है..।” उस जवाब से अखिलेश को ना सिर्फ एडमिशन मिला, बल्कि अंग्रेजी बोलने को लेकर उनका आत्मविश्वास भी इतना बढ़ गया कि आज बतौर नेता उन्हें अक्सर धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलते देखा जा सकता है।







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