Wednesday, October 20, 2021

जब डेढ़ साल के चिराग को कपड़े में लपेट घर से भागे थे रामविलास पासवान, किसी तरह बची थी जान

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राम विलास पासवान ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ विरोध का बिगुल फूंक कर की थी। वह जेपी आंदोलन में भी सक्रिय थे। साल 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली में फैले सिख विरोधी दंगे में वे बाल बाल बचे थे। भीड़ ने पासवान के घर को आग लगा दी थी और वह बहुत मुश्किल से जान बचाकर निकल पाए थे।

हाल ही में पेंगुइन प्रकाशन से आई पासवान की जीवनी ‘राम विलास पासवान: संकल्प, साहस और संघर्ष’ में प्रदीप श्रीवास्तव ने इस घटना का विस्तार से जिक्र किया है। प्रदीप लिखते हैं, ‘इंदिरा गांधी की मौत के बाद अचानक दिल्ली का माहौल बदल गया। ऐसे माहौल में पासवान चरण सिंह के निवास स्थान, 12 तुगलक रोड पहुंचे। वहां बैठक के बाद पासवान और दूसरे नेता राष्ट्रपति भवन गए। ज्ञानी जैल सिंह ने उनसे दिल्ली की स्थिति के बारे में पूछा। सभी नेताओं ने राष्ट्रपति को दंगों के बारे में बताया।’

तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह से मिलने के बाद विपक्षी नेताओं का प्रतिनिधिमंडल वापस निकला। पासवान अपने घर पहुंचे तो उनके साथ कुछ नेता भी थे। पासवान अपने ड्राइंग रूम में बैठे ही थे कि एक सरदार बदहवास हालत में उनके घर में आ घुसा। हिंसक भीड़ उसका पीछा कर रही थी। वह एक टैक्सी ड्राइवर था। पासवान ने बिना कुछ सोचे उसे अंदर ले लिया। इस दौरान कर्पूरी ठाकुर भी बैठे हुए थे। पासवान को तब सिर्फ एक सुरक्षा गार्ड मिला था। देखते ही देखते बाहर सैकड़ों की भीड़ जमा हो गई और सरदार को बाहर भेजने के लिए कहने लगी।

चिराग को कपड़े में लपेटा: भीड़ की स्थिति देखकर लग रहा था कि उन्हें इकलौता सुरक्षा गार्ड शांत नहीं करवा सकता है। ऐसे में पुलिस को फोन किया जाने लगा लेकिन किसी से बात नहीं हो पाई। इधर, भीड़ उग्र हो रही थी। पासवान के इकलौते सुरक्षाकर्मी ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हवाई फायर भी किया, लेकिन कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

भीड़ का रौद्र रूप देखकर पासवान, कर्पूरी ठाकुर और घर में बैठे दूसरे सांसद बुरी तरह डर गए। रामविलास पासवान को सबसे ज्यादा चिंता अपने बेटे चिराग की थी, जो उस वक्त सिर्फ डेढ़ साल के थे। इससे पहले कोई मदद मिल पाती भीड़ ने मकान में आग लगा दी। जान बचाने के लिए कर्पूरी ठाकुर समेत सभी पीछे के रास्ते दीवार से बाहर कूदने लगे।

चिराग पासवान और उनकी बेटी को पूरी तरह कपड़े में लपेट दिया गया और घर में काम करने वाली बाई किसी तरह उनको लेकर बाहर निकली। घर से चंद कदम निकलने के बाद पासवान ने देखा कि उनका घर धधककर जल रहा है। सालों से इकट्ठा की गई गृहस्थी, कपड़े-लत्ते, दस्तावेज आदि जलकर स्वाहा हो गए।



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