Thursday, October 21, 2021

जापान ने बढ़ाई विश्व की चिंता! समुंदर में छोड़ेगा न्यूक्लियर प्लांट का 10 लाख टन गंदा पानी

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जापान ने बढ़ाई विश्व की चिंता! समुंदर में छोड़ेगा न्यूक्लियर प्लांट का 10 लाख टन गंदा पानी

जापान ने Fukushima nuclear plant के 10 लाख टन से अधिक गंदे पानी को समुद्र में छोड़ने का फैसला किया है। हालांकि, यह प्रक्रिया करीब दो सालों में शुरू होगी। जापान सरकार के मुताबिक इसको पूरा होने में दशकों लग सकते हैं, लेकिन विश्व समुदाय की चिंता इससे बढ़ गई है। चीन ने तीखे तेवर दिखाते हुए इसे गैरजिम्मेदाराना रवैया बताया है।

जापान का तर्क है कि समुद्र में इस पानी को छोड़ना सुरक्षित है, क्योंकि पानी में मौजूद रेडियोएक्टिव तत्व पहले ही निकाल लिए गए हैं। इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी ने फैसले पर सहमति जताई है। उसका कहना है कि विश्व के दूसरे हिस्सों में भी दूषित पानी को ठिकाने लगाने का यही तरीका अमल में लाया जाता है। जापान के पीएम Yoshihide Suga ने अपने मंत्रियों को बताया कि पानी को ठिकाने लगाना बेहद जटिल है।

उन्होंने बताया कि प्लांट का संचालन करने वाला टोक्यो इलेक्ट्रिक पॉवर इस पूरी प्रक्रिया का देखरेख करेगा। सरकार ने एक बयान जारी कर कहा कि रेगुलेटरी स्टेंडर्ड का साथ सख्ती से अनुपालन करते हुए हमने दूषित पानी को समुद्र में बहाने का विकल्प चुना है। जापानी पीएम का कहना है कि पानी समुद्र में तभी छोड़ा जाएगा जब यह पूरी तरह से सुरक्षित मानकों पर खरा उतरेगा।

nuclear plant के टैंक में तकरीबन 12.5 लाख टन गंदा पानी जमा है। 2011 में आई सुनामी की वजह से यह समस्या पैदा हो रही है। सरकार के इस निर्णय की पड़ोसी मुल्क चीन समेत पर्यावरण समूहों ने आलोचना की है। माना जा रहा है कि जापान के समुद्र में दूषित पानी छोड़ने से मछली पकड़ने वाले उद्योग को खासा नुकसान हो सकता है। इससे मछलियों के मारे जाने का खतरा है।

चीन के विदेश मंत्रालय ने इस कदम को बेहद गैर जिम्मेदाराना बताया है। चीन ने कहा कि ऐसा होने पर बीजिंग के पास कड़े कदम उठाने के अलावा कोई और कदम नहीं होगा। दक्षिण कोरिया की सरकार ने कहा कि यह योजना पूरी तरह गलत है। अमेरिका हालांकि जापान के समर्थन में है। उसका कहना है कि जापान पारदर्शी रवैया दिखाते हुए इस पर काम कर रहा है। जो भी अंतरराष्ट्रीय मानक हैं, उनका पालन इसमें किया जा रहा है।

सूत्रों का कहना है कि इस पानी को साफ किया गया है, लेकिन इसमें से खतरनाक आइसोटोप्स को हटाने के लिए एक बार और फिल्टर करने की जरूरत है। समुद्र में छोड़ने से पहले पानी को और पतला किया जाएगा, ताकि इसमें से खतरनाक चीजें निकाली जा सकें। लेकिन यह बात उन स्थानीय लोगों के गले से नीचे नहीं उतर रही है जिन्होंने इस फैसले के खिलाफ कोर्ट जाने का फैसला किया है। उनका कहना है कि जापान सरकार को अपने इस फैसले से पीछे हटना चाहिए।






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