Thursday, October 28, 2021

डॉ. हर्षवर्धन ने कोरोना या स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय से जुड़े ट्वीट करना किया बंद

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कैबिनेट से हटने के बाद डॉ. हर्षवर्धन सोशल मीडिया पर तो उसी तरह सक्रिय हैं, लेकिन उन्‍होंने स्वास्थ्य मंत्रालय या कोरोना जैसे मसलों पर ट्वीट करना बंद कर दिया है। अब उनके ज्‍यादातर ट्वीट्स प्रधानमंत्री व उनके कार्यक्रम से जुड़े ही हैं। यहां तक क‍ि वह स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय की कोरोना से जुड़ी ब्रीफ‍िंंग या अन्‍य जानकार‍ियों को भी ट्वीट नहीं करते। कोरोना से जुड़े जो ट्वीट उन्‍होंने क‍िए हैं, उनमें से अध‍िकतर प्रधानमंत्री के भाषण या बैठक आद‍ि से ही जुड़े हैं।

प्रधानमंत्री ने पिछले दिनों कैबिनेट विस्तार के दौरान कई दिग्गज मंत्रियों की छुट्टी कर सबको चौंका दिया था। मंत्रिमंडल से बाहर क‍िए जाने वाले कद्दावर नेताओं में डॉ. हर्षवर्धन भी हैं। सियासी गलियारों में ऐसा कहा गया कि कोरोना के दौरान कुप्रबंधन के चलते डॉ. हर्षवर्धन पर गाज गिरी। उनकी जगह मनसुख मांडविया को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री बनाया गया है।

बतौर स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री हर्षवर्द्धन कोविड से जुड़े आंकड़े, वैक्सिनेशन आदि को लगातार ट्वीट करते रहते थे। कैबिनेट विस्तार के बाद वे ट्विटर पर लगातार सक्रिय हैं, लेकिन उनके ग‍िने-चुने ट्वीट्स ही ऐसे हैं, ज‍िनका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधा संबंध न हो।

15 जुलाई को दोपहर तीन बजे तक हर्षवर्द्धन के अकाउंट से क‍िए गए आठ में से पांच ट्वीट्स प्रधानमंत्री से जुड़े थे। इनमें से ज्‍यादातर नरेंद्र मोदी के बनारस दौरे से जुड़े (लाइव स्‍ट्रीम‍िंंग सह‍ित) ट्वीट थे। एक में उन्‍होंने पीएम मोदी के बयान का जिक्र करते हुए ट्वीट किया, ‘नई पीढ़ी के युवाओं का कौशल विकास, एक राष्ट्रीय ज़रूरत है, आत्मनिर्भर भारत का बहुत बड़ा आधार है। वर्ल्ड यूथ स्किल्स डे पर PM नरेंद्र मोदी जी का यह संदेश बेहद अर्थपूर्ण है क्योंकि जो स्किल्ड होगा वही विकास करेगा।

इससे पहले 14-15 जुलाई की आधी रात डॉ. हर्षवर्धन ने पीयूष गोयल को राज्यसभा में नेता बनाए जाने को लेकर भी ट्वीट किया और लिखा था, ‘पीयूष जी में सबको साथ लेकर चलने की नैसर्गिक प्रतिभा है। मुझे उम्मीद है कि वह सदन में सबके बीच बेहतर संबंध स्थापित कर अपनी असाधारण योग्यता का प्रमाण देंगे।’ 14 जुलाई को उन्‍होंने केंद्रीय कर्मचार‍ियों का डीए बढ़ाने (Central government employees DA hike) के ऐलान को भी अपने अकाउंट से ट्वीट क‍िया था।

डॉ. हर्षवर्धन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तमाम ट्वीट भी रिट्वीट किए हैं। आपको बता दें कि कैबिनेट से डॉ. हर्षवर्धन, रविशंकर प्रसाद और प्रकाश जावड़ेकर जैसे दिग्गज नेताओं की छुट्टी कर पीएम मोदी ने सबको चौंका दिया था। सियासी गलियारों में इन नेताओं को हटाने के पीछे अलग-अलग वजहें और तर्क गिनाए गए। रविशंकर प्रसाद को हटाने के पीछे ट्विटर से उनके विवाद को भी जोड़कर देखा गया।

कैबिनेट से हटाने के बाद इन नेताओं की नाराजगी की बात भी सामने आई। इसी बीच 12 जुलाई को रविशंकर प्रसाद ने ट्वीट कर नए सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव को बधाई दी और नए आईटी नियमों का कड़ाई से पालन करने पर जोर देने के लिए उनकी तारीफ भी की। जाहिर तौर पर उनका निशाना ट्विटर की तरफ ही था।

इस बीच, खबर यह भी है क‍ि इस संबंध में सरकार ने अमेर‍िकी कंपनी ऐप्‍पल को इन न‍ियमों का पालन करने संबंधी जो पत्र भेजा था, उसे वापस ले ल‍िया गया है। इंड‍ियन एक्‍सप्रेस की खबर के मुताब‍िक सरकार को जब अहसास हुआ क‍ि ऐप्‍पल तो सोशल मीड‍िया प्‍लैटफॉर्म नहीं है, इसल‍िए उसकी ई-मैसेज सेवा भारत के आईटी कानून के दायरे में नहीं आएगी, तो पत्र वापस ले ल‍िया गया।

उधर, स्वास्थ्य मंत्रालय का पद संभालने के बाद मनसुख मांडविया मंत्रालय के कामकाज, कोविड और वैक्सिनेशन जैसे मसलों पर लगातार ट्वीट कर रहे हैं। एक दिन पहले ही उन्होंने ट्वीट किया था, ‘वैक्सीन की उपलब्धता के संदर्भ में मुझे विभिन्न राज्य सरकारों और नेताओं के बयान एवं पत्रों से जानकारी मिली है। तथ्यों के वास्तविक विश्लेषण से इस स्थिति को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है। निरर्थक बयान सिर्फ लोगों में घबराहट पैदा करने के लिए किए जा रहे हैं।’



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