Monday, October 18, 2021

दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने को तैयार नहीं थे डॉ. मनमोहन सिंह, रखी थी ये शर्त

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साल 2004 के लोकसभा चुनाव में यूपीए ने जीत दर्ज कर सबको चौंका दिया था। इस जीत के बाद सोनिया गांधी का प्रधानमंत्री बनना तय माना जा रहा था। हालांकि ऐन मौके पर उन्होंने डॉ. मनमोहन सिंह का नाम आगे कर दिया और वे प्रधानमंत्री बने। तब सियासी गलियारों में सोनिया के पीएम का पद ठुकराने के पीछे कई वजहें बताई गईं और अटकलें लगीं। जिनमें से एक, उनके विदेशी मूल के होने का मुद्दा भी था।

हालांकि तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था कि अगर सोनिया गांधी चाहती तो प्रधानमंत्री बन सकती थीं। उन्हें तमाम राजनीतिक दलों की तरफ से ई-मेल और चिट्ठियां आई थीं, जिसमें सोनिया को प्रधानमंत्री बनाए जाने का विरोध किया गया था। लेकिन यह मांग संवैधानिक रूप से सही नहीं थी।

दोबारा तैयार करानी पड़ी थी चिट्ठी: कलाम ने अपनी किताब ‘टर्निंग पॉइंट्स’ में लिखा है कि यूपीए की जीत के बाद राष्ट्रपति भवन ने सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनाने से संबंधित चिट्ठी भी तैयार कर ली थी। लेकिन जब सोनिया गांधी उनसे मिलीं और डॉ. मनमोहन सिंह का नाम आगे किया तो वह चकित रह गए थे। बाद में दोबारा चिट्ठी तैयार करानी पड़ी थी।

बाद के दिनों में खुद सोनिया गांधी ने एक सवाल के जवाब में कहा था कि मुझे अपनी सीमाओं के बारे में पता था और यह भी मालूम था कि डॉ. मनमोहन सिंह मुझसे बेहतर प्रधानमंत्री साबित होंगे, इसीलिए उनका नाम आगे किया था।

सोनिया-राहुल के सामने रखी थी शर्त: साल 2009 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर यूपीए की सरकार बनी। उस वक्त भी प्रधानमंत्री पद को लेकर अटकलें लगीं। सियासी गलियारों में राहुल गांधी का नाम भी उछाला गया। वरिष्ठ पत्रकार वीर सांघवी ने अपनी किताब ‘अ रूड लाइफ: द मेम्योर’ (A Rude Life: The Memoir) में लिखते हैं कि डॉ. सिंह दूसरी बार पीएम बनने को तैयार नहीं थे और उन्होंने सोनिया और राहुल गांधी के सामने शर्त रख दी थी। शर्त यह थी कि अगर उन्हें प्रधानमंत्री के तौर पर कार्यकाल पूरा करने का मौका मिलेगा तभी दोबारा पद संभालेंगे।

अफवाह से परेशान हो गए थे मनमोहन सिंह: दरअसल, उस वक्त यासी गलियारों में ऐसी चर्चा थी कि कुछ साल बाद उन्हें हटाकर राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाया जा सकता है। बकौल सांघवी, डॉ. मनमोहन सिंह इन अफवाहों से परेशान हो गए थे।वे लिखते हैं कि तब राहुल गांधी ने उन्हें आश्वासन दिया था कि उनकी प्रधानमंत्री बनने की कोई इच्छा नहीं है। इसके बाद उन्होंने दोबारा पद संभाला था।



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