Thursday, October 28, 2021

न तो पेंशन लेती हैं और ना ही CM की सैलरी, फिर कैसे चलता है ममता बनर्जी का खर्च?

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Mamata Banerjee: बंगाल चुनाव के परिणाम घोषित हो चुके हैं और बार फिर बंगाल की जनता ने ‘दीदी’ को भारी बहुमत से जिताया है। तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी का राजनीतिक करियर काफी दिलचस्प रहा है। साल 2011 और 2016 में भी जीत हासिल कर चुकीं दीदी पिछले करीब 45 सालों से राजनीति में सक्रिय हैं।

5 जनवरी 1955 को कोलकाता के एक बेहद सामान्य परिवार में जन्मीं ममता बनर्जी बंगाल की सीएम बनने से पहले केंद्र सरकार में कोयला, मानव संसाधन एवं विकास, रेल और महिला एवं बाल विकास मंत्री जैसी जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। एक इंटरव्यू में ममता बनर्जी ने बताया था कि पिछले 7 सालों से न तो उन्होंने अपनी पेंशन उठाई है और न ही मुख्यमंत्री की सैलरी ली है। तो आइए जानते हैं कि कैसे चलता है ममता बनर्जी का खर्च –

संसद से नहीं लेती हैं पेंशन: ट्विटर पर अनारकली ऑफ आरा जैसी फिल्मों के निर्देशक अविनाश दास ने एक वीडियो क्लिप शेयर किया है जिसमें ममता बनर्जी बता रही हैं कि संसद से जो उन्हें पेंशन मिलता है उसकी राशि करीब 75 हजार रुपये है जिसे पिछले 7 सालों से उन्होंने नहीं लिया है।

यही नहीं, ममता मुख्यमंत्री की सैलरी भी नहीं लेती हैं और न ही किसी गाड़ी का इस्तेमाल करती हैं। इसके अलावा, इस वीडियो में वो बता रही हैं कि कहीं आने-जाने के लिए भी ममता इकोनॉमी क्लास में ही सफर करती हैं। वहीं, कभी अगर किसी गेस्ट हाउस में रहना पड़ता है तो वो खुद के पैसे ही खर्च करती हैं।

कहां से आता है पैसा: ममता बताती हैं कि अब तक उनकी 86-87 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें से कई बेस्ट सेलर किताबें भी हैं। इसके जरिये उन्हें जो रॉयल्टी मिलती है वो उनके लिए पर्याप्त है। बता दें कि इसके अलावा, ममता गानों की लिरिक्स भी लिखती हैं जिसके जरिये भी उन्हें पैसा आता है। साथ ही, उन्हें पेंटिंग का भी शौक है लेकिन इससे उनकी जो भी कमाई होती है वो उसे डोनेट कर देती हैं।

कितनी हो जाती है कमाई: इस वीडियो क्लिप में ममता बता रही हैं कि जिस गाने की कंपनी में वो लिरिक्स देती हैं उसके लिए उन्हें सालाना करीब 3 लाख रुपये मिलते हैं। वहीं, किताब प्रकाशन के जरिये साल में उन्हें करीब 10-11 लाख रुपये मिल जाते हैं जो उनके लिए पर्याप्त हैं। ममता कहती हैं कि वो तो अकेले हैं इसलिए उन्हें ज्यादा पैसों की जरूरत नहीं होती।



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