Thursday, October 21, 2021

भूली-बिसरी देसी लज्जत

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मानस मनोहर

सही भोजन का चुनाव, उसे सही तरीके से पकाना और फिर सही तरीके से खाना जरूरी है। मगर शहरी शैली में हमने इन तीनों चीजों को तकरीबन भुला ही दिया है। इस तरह कई पारंपरिक खाद्य भी धीरे-धीरे चलन से बाहर होते गए हैं। उन्हें अपने भोजन में शामिल करें, तो परिणाम तो अद्भुत निकलेंगे, खाने की पुरानी लज्जत का भी मजा आएगा।

सफेद कद्दू
सफेद कद्दू यानी पेठा, या यों कहें कि जिससे पेठा मिठाई बनती है। वैसे कई लोग सीताफल को भी पेठा ही कहते हैं, पर पेठा दरअसल सफेद कद्दू है। इसे बिहार और उत्तर प्रदेश के इलाकों में भतुआ भी कहते हैं। गोल आकार का इसका फल होता है। यह अक्सर स्वाभाविक रूप से जंगली इलाकों में उग आता है और पेड़ों पर चढ़ कर खूब फल देता है। कई किसान इसकी खेती भी करते हैं, क्योंकि इसी से पेठा मिठाई बनती है।

सेहत की दृष्टि से सफेद कद्दू बहुत गुणकारी माना गया है। आयुर्वेद में इसके रस को मधुमेह जैसे रोगों से मुक्ति दिलाने वाला बताया गया है। यह हमारे शरीर की प्राण ऊर्जा को जगाता है। इसकी तासीर ठंडी होती है, इसलिए अगर सुबह इसका रस पीएं, तो दिन भर शरीर में ताजगी और स्फूर्ति बनी रहती है। इससे भरपूर ऊर्जा मिलती है। जो भोजन केवल जीभ के स्वाद के लिए आजकल खाया जाने लगा है, उससे शरीर में स्फूर्ति के बजाय आलस्य बना रहता है। उसे पचाने में शरीर को अधिक श्रम करना पड़ता है। सफेद कद्दू पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करता है।

इसलिए जिन लोगों को ऐसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हो, उन्हें कम से कम एक हफ्ते तक सुबह सिर्फ सफेद कद्दू का रस पीना चाहिए। सफेद कद्दू का रस पीना ही जरूरी नहीं है। इससे कई स्वादिष्ट व्यंजन भी बनते हैं। इसका इस्तेमाल आप पाव-भाजी के लिए भाजी बनाने में कर सकते हैं। भाजी के लिए जो सब्जियां ले रहे हों, उसमें एक तिहाई मात्रा सफेद कद्दू की रखें, इससे भाजी गाढ़ी और स्वादिष्ट बनेगी। जब सांभर बना रहे हों, तो उसमें भी सफेद कद्दू डाल सकते हैं। इसे कद्दूकस करके हलवा या बर्फी भी बना सकते हैं। चूंकि इसका स्वाद मीठा नहीं होता, इसे किसी भी सब्जी के साथ मिला कर बना सकते हैं। इसका स्वाद लौकी और सीताफल से बिल्कुल अलग होता है।

अगर इसे आलू के साथ भी मिला कर बनाएं, तो वह उसी के स्वाद में रस-बस जाएगा। यों, सबसे बेहतर तो यह है कि इसका छिलका उतार कर सामान्य तरीके से एक चम्मच देसी घी में जीरे का तड़का दें और इसे छौंक कर सादे रूप में खाएं। उत्तर प्रदेश और बिहार में सफेद कद्दू के साथ मूंग या उड़द की दाल पीस कर वड़ियां भी बनाई जाती हैं, जिन्हें सुखा कर रख लिया जाता है और बरसात के समय उसे तरी में पका कर खाया जाता है। जिस भी रूप में चाहें, इसका सेवन अवश्य करें, फिर अपने शरीर में इसका प्रभाव देखें।

अगर इसे शहरी स्वाद में ढालना चाहते हैं, तो इससे कोफ्ते भी बना सकते हैं। इसका कोफ्ता बनाना बहुत आसान है। जैसे लौकी के कोफ्ते बनाते हैं, वैसे ही इसके बनाएं। सबसे पहले इसका छिलका और बीज वाला हिस्सा निकाल कर कद्दूकस कर लें और उसमें बेसन, हल्दी, नमक, हींग, अजवाइन, गरम मसाला डाल कर मिश्रण तैयार करें और इसे तल कर पकौड़े तैयार कर लें। फिर तरी के साथ इसे पका लें। सफेद कद्दू के कोफ्ते तैयार हैं।

सीताफल की बर्फी
सीााफल या काशीफल को कुछ लोग कोंहड़ा, कुम्हड़ा और कदीमा भी कहते हैं। अंग्रेजी में पंपकिन। इसके बीज तो आजकल बड़े-बड़े मॉलों में डिब्बों में बंद करके बिकने लगे हैं। जिन्हें प्रोस्टेट की समस्या है, वे इस बीज को खाते हैं। सीताफल की बर्फी बर्फी भी लाजवाब बनती है। इसे बनाने के लिए बहुत कौशल की जरूरत नहीं पड़ती। जब बाहर की मिठाइयां खरीद कर खाते हैं, तो घर में बना कर क्यों न खाएं। सीताफल की बर्फी सेहत और स्वाद दोनों की दृष्टि से बेहतर विकल्प है। इस समय जैसा मौसम चल रहा है, उसमें मिठाई खानी ही है, तो सीताफल की बर्फी बना कर रख लें और कई दिन तक खाते रहें।

बर्फी बनाने के लिए लाल वाला सीताफल लें। उसके बीज वाला हिस्सा और छिलका उतार कर अलग करें और कद्दूकस कर लें। बीज को धोकर सुखा लें और छिलका उतार कर रख लें। उसे यों ही चबा कर खा सकते हैं या खीर, हलवा, मिठाई में मेवे के साथ काट कर डाल सकते हैं। अगर एक किलो सीताफल लिया है, तो करीब ढाई सौ ग्राम चीनी और दो सौ ग्राम नारियल का चूरा ले लें। इसमें डालने के लिए दो-तीन चम्मच देसी घी की भी जरूरत पड़ेगी।

कड़ाही गरम करें। उसमें एक चम्मच घी डाल कर मध्यम आंच पर दो से तीन मिनट तक घिसे हुए सीताफल को भूनें। फिर उसमें चीनी डाल कर अच्छी तरह मिला दें और ढक्कन लगा दें। पांच-सात मिनट बाद ढक्कन हटा दें। चलाते हुए देखें, जब सीताफल का पानी सूखने लगे, तो उसमें नारियल का बूरा डालें। चुटकी भर कुटी हरी इलाइची और अगर कुछ मेवे डालना चाहते हैं, तो डाल दें। सारी चीजों को अच्छी तरह मिला लें। अब एक चम्मच घी डालें और पानी सूखने तक चलाते हुए पकाएं। जब पानी सूख जाए तो आंच बंद कर दें।

एक बड़ी थाली या ट्रे में हल्का तेल चुपड़ें और उस पर इस पके हुए सीताफल को बराबर मोटाई में फैला दें। ऊपर से थोड़ा-सा घी और फैला दें, इससे बर्फी में चमक आ जाएगी। ठंडा होने दें। जब मिश्रण ठंडा हो जाए, तो मनचाहे आकार में बर्फी काट लें। डिब्बे में बंद करके रखें, पंद्रह-बीस दिन तक खाते रहें। इसमें ऐसी कोई चीज नहीं पड़ी है, जो खराब हो या नुकसान करे। खुद खाएं, मेहमानों को भी खिलाएं।



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