Sunday, October 24, 2021

माह बासंती का स्वाद केसर भात और चुकंदर कटलेट

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मानस मनोहर
हर मौसम, हर त्योहार के कुछ खास व्यंजन होते हैं, उनका आनंद उसी समय आता भी है। यों तो शहरी चलन में बारहो महीने हर तरह के खाद्य खाए जाने लगे हैं, पर खासकर पर्व-त्योहारों पर परंपरा से चले आ रहे व्यंजन अवश्य बनाने और खाने चाहिए। यह बसंत का मौसम है, ठंड हल्की होने लगी है, इसलिए धीरे-धीरे अपने खानपान में चटपटापन, तेज मसाले वगैरह का इस्तेमाल कम करते जाना चाहिए। पाचन तंत्र को ठीक रखने में इससे मदद मिलती है।

केसर भात
उत्तर भारत में बसंत पंचमी पर ही पीले मीठे चावल बनते हैं। इसका नाम केसर भात इसलिए पड़ा है कि इसे केसर के साथ पकाया जाता है, जिससे चावल का रंग पीला हो जाता है और उसमें केसर की खुशबू भी बसी रहती है। कई लोग केसर उपलब्ध न होने की वजह से इसमें हल्दी का भी उपयोग करते हैं। कुछ लोग मिठाई में पड़ने वाला पीला रंग भी डालते हैं। आप भी अपनी सुविधानुसार इनमें से किसी भी चीज का उपयोग कर सकते हैं।

केसर भात बनाना बहुत आसान है। भात यानी पका हुआ चावल। केसर भात में केसर के अलावा चीनी, खांड या गुड़ भी उपयोग किया जाता है, इसलिए यह सामान्य भात से थोड़ा अलग हो जाता है। इस तरह आपने इसे पकाने के बारे में कुछ-कुछ अंदाजा लगा लिया होगा। फिर भी इसे पकाने के तरीके पर चर्चा कर लेते हैं।

सबसे पहले चावल को अच्छी तरह धोकर पानी में थोड़ी देर के लिए भिगो कर रखें। चावल के बराबर ही चीनी या खांड ले लें। जैसे एक कटोरी चावल लिया है, तो चीनी भी एक कटोरी ही लें। इसके अलावा इसमें डालने के लिए कुछ केसर की पंखुड़ियों और चुटकी भर कुटी इलाइची की जरूरत पड़ेगी। अगर केसर नहीं है, तो हल्दी का उपयोग कर सकते हैं। मगर हल्दी की मात्रा चुटकी-डेढ़ चुटकी ही रखें। ज्यादा हल्दी डालने से रंग ज्यादा गाढ़ा पीला हो जाएगा और हल्दी की महक केसर भात का मजा किरकिरा कर सकती है।

अगर कच्ची हल्दी की गांठ हो, तो इसमें उसका भी उपयोग किया जा सकता है। कच्ची हल्दी डालनी हो, तो करीब आधा से एक इंच टुकड़ा लें और उसका छिलका उतार कर अलग रख लें। इसे कूटें नहीं। इसे सीधा डालें और फिर भात पक जाने के बाद उस टुकड़े को निकाल कर अलग कर दें, उससे हमें जो पीलापन चाहिए वह मिल जाएगा।

जब केसर भात आप व्यंजन के रूप में बना रहे हैं, तो इसे क्यों न शाही अंदाज में बनाएं। इसमें किशमिश और काजू से स्वाद बढ़ जाता है, इसलिए जब भी केसर भात बनाएं, पंद्रह-बीस किशमिश और आठ-दस काजू अवश्य ले लें। काजू को दो हिस्सों में तोड़ लें। एक कड़ाही या भगोने में एक से डेढ़ चम्मच घी गरम करें। आंच को मध्यम रखें। उसमें पहले किशमिश और फिर काजू के टुकड़ों को दो-दो मिनट के लिए तल कर अलग निकाल कर रख लें। फिर उसी में भीगे हुए चावल डाल कर दो मिनट के लिए चलाएं।

ज्यादा देर चलाने की जरूरत नहीं होती। फिर उसमें चावल से डेढ़ गुना पानी डालें। जैसे एक कटोरी चावल लिया है, तो डेढ़ कटोरी पानी डालें। इसी समय हल्दी या केसर और कुटी इलाइची भी डाल दें। मध्यम आंच पर पकाएं। जब चावल करीब दो तिहाई पक जाए, तो उसमें चीनी और आधे तले किशमिश और काजू डाल दें। सारी चीजों को अच्छी तरह मिलाएं और ढक्कन लगा कर पानी सूखने तक पकने दें। केसर भात तैयार है। इस पर बचे हुए किशमिश और काजू डाल कर गरमागरम या फिर ठंडा होने के बाद परोसें।

चुकंदर कटलेट
कटलेट को पकाने के दो तरीके हैं- इन्हें गरम तेल में तला भी जा सकता है और मोटे तवे पर कम तेल में सेंका भी जा सकता है। चुकंदर का कटलेट बनाने के लिए पहले छिलका उतार कर इसे कद्दूकस कर लें। हथेलियों में दबा कर इसका रस बाहर निकाल लें। अगर एक चुकंदर कद्दूकस किया है, तो दो उबले हुए आलू लें। चुकंदर का स्वाद मीठा होता है, इसलिए इसमें कुछ अधिक हरी मिर्च का इस्तेमाल कर सकते हैं। मिर्च को बारीक-बारीक काट लें।

इसके अलावा हरा धनिया, थोड़ा-सा अदरक भी महीन-महीन काट लें। आलू को भी कद्दूकस कर लें। सारी चीजों को एक साथ मिला लें। अब इसमें एक छोटा चम्मच धनिया पाउडर, चौथाई चम्मच गरम मसाला, चौथाई चम्मच लाल मिर्च पाउडर और चाट मसाला डालें। आधा कटोरी ब्रेड क्रम डालें और सारी चीजों को अच्छी तरह मसल कर पिट्ठी तैयार कर लें।

ब्रेड क्रम तैयार करने के लिए ब्रेड के टुकड़ों को ग्राइंडर में पीस लें। थोड़ा ब्रेड क्रम अलग प्लेट में निकाल कर रखें, ताकि उसे कटलेट के ऊपर लगाया जा सके। अब तैयार पिट्ठी में से छोटे-छोटे टुकड़े लेकर हथेलियों पर दबाते हुए गोलाकार टिक्की या फिर बेलनाकार कटलेट बना लें। इन कटलेट को ब्रेड क्रम में लपेट लें। इससे इसके फटने की संभावना नहीं रहती।

जैसा कि पहले बता चुके हैं, कटलेट बनाने के दो तरीके हैं- तल कर या सेंक कर। इसे बनाने के लिए आप अपनी सुविधानुसार दोनों में से कोई भी विधि चुन सकते हैं। यों नॉन स्टिक पैन में हल्का तेल लगा कर इन्हें सेंकते हुए पकाएं, तो फटने के भय से बच सकते हैं और कम तेल खाने वालों के लिए भी बेहतर रहता है। इसे हरी या लाल किसी भी चटनी के साथ चाय के समय परोसें और आनंद लें। बच्चे भी इस कटलटे के दीवाने हो जाएंगे।



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