Wednesday, October 20, 2021

मेरे सामने IAS ने पकड़ी पीकदान, लालू ने थूका और कहा- नीचे रख दो- उमा भारती का ट्वीट

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बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव से जुड़ा किस्सा उमा भारती ने साझा किया है। उमा भारती ने बताया कि लालू ने मेरे सामने पीकदान IAS अधिकारी के हाथ में थमाया था।

पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती के ब्यूरोक्रेसी द्वारा चप्पल उठाने वाले बयान पर सियासी घमासान मच गया है। विपक्षी पार्टियों द्वारा मामले को तूल देने के बाद उन्होंने अपनी सफाई पेश की है। उमा भारती ने सिलसिलेवार एक के बाद एक कई ट्वीट किये और लिखा, ‘ब्यूरोक्रेसी पर बोली असंयत भाषा पर मैंने आत्मग्लानि का अनुभव किया और उसे व्यक्त भी किया किन्तु मेरे भाव बिलकुल सही थे। मैं तो किसी को अपने पांव भी नहीं छूने देती हूं तो किसी से चप्पल उठाने की बात कैसे कह सकती हूं?’ भारती ने इस बहाने एक किस्सा भी साझा किया है।

उमा भारती ने लिखा है कि साल 2000 में जब मैं केंद्र की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में पर्यटन मंत्री थी, तब बिहार में वहां की मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और उनके पति लालू यादव जी के साथ मेरा पटना से बोधगया हेलीकॉप्टर से जाने का दौरा हुआ। हेलीकॉप्टर में हमारे सामने की सीट पर बिहार के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी भी बैठे थे। लालू यादव जी ने मेरे ही सामने अपने पीकदान में थूका एवं उस वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के हाथ में थमाकर उसको खिड़की के बगल में नीचे रखने को कहा और उस अधिकारी ने ऐसा किया भी।

भारती ने आगे लिखा, ‘इसलिये 2005-06 में जब मुझे बिहार का प्रभारी बनाया गया और बिहार के पिछड़ेपन के साथ मैंने पीकदान को भी मुद्दा बनाया और प्रशासनिक अधिकारियों से अपील की कि आज आप इनका पीकदान उठाते हो, कल हमारा भी उठाना पड़ेगा। अपनी गरिमा को ध्यान में रखो तथा पीकदान की जगह फ़ाइल और कलमदान से चलो।’

उन्होंने आगे लिखा है, ‘बिहार की सत्ता पलट गई। मैं नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद की शपथ के बाद लौटी, मध्यप्रदेश में गौर जी मुख्यमंत्री थे किन्तु मेरे घर पर लगभग सभी अधिकारियों की भीड़ लगी रहती थी, इससे मुझे शर्मिंदगी होती थी। बिहार से आते ही मुझे पार्टी से निकाल दिया गया। गौर जी भी हट गये। फिर तो मुझे मध्यप्रदेश में किसी रेस्ट हाउस में कमरा मिलना भी मुश्किल हो गया। प्रशासनिक अधिकारी तो मेरे छाया से भागने लगे।’

‘क्या मोदी जी के मुंह से ऐसी बात सुनी?’ : उमा भारती ने अपने एक ट्वीट में पीएम मोदी का भी उदाहरण दिया। उन्होंने लिखा, ‘यह निर्णय देश के, सभी राज्यों के ब्यूरोक्रेट्स को करना होगा कि वह शासन के अधिकारी, कर्मचारी एवं जनता के सेवक हैं, किसी राजनीतिक दल के घरेलू नौकर नहीं। यह जुमला, ‘अफसरशाही देश नहीं चलने देती’, कई निकम्मे सत्तारूढ़ नेताओं के लिए रक्षा कवच का काम करता है।

क्या आपने कभी हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी के मुंह से ऐसी बात सुनी है? उन्होंने तो पहले गुजरात में मुख्यमंत्री के तौर पर और फिर देश के प्रधानमंत्री के तौर पर सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के सहयोग एवं उपयोग से देश को कई बड़े संकटों से ऊबारा।

किस बयान पर मचा था विवाद? दरअसल, बीते दिनों एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान बीजेपी की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने नौकरशाही को चप्पल उठाने वाला बता दिया था। उन्होंने कहा था कि ब्यूरोक्रेसी कुछ नहीं होती, बल्कि चप्पल उठाने वाली होती है… चप्पल उठाती है हमारी। भारती ने आगे कहा था कि आपको क्या लगता है कि ब्यूरोक्रेसी नेता को घुमाती है? ऐसा नहीं है। भारती के इसी बयान को विपक्षी पार्टियों ने मुद्दा बना लिया था। ब्यूरोक्रेसी के एक खेमे ने भी इस पर नाराजगी जाहिर की थी।



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