Thursday, October 21, 2021

राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह को पंजाब से जुड़ा कोई कागजात नहीं भेजती थीं इंदिरा गांधी, राजीव गांधी भी हो गए थे खफ़ा

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भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का कार्यकाल बतौर प्रधानमंत्री काफी छोटा रहा, लेकिन उन्होंने कई चीजों के लिए भारत के दरवाजे खोले थे। राजीव गांधी का रुझान राजनीति की तरफ नहीं था, लेकिन इंदिरा गांधी के आकस्मिक निधन के बाद उन्हें सियासत के अखाड़े में उतरना पड़ा। राजीव गांधी बेबाक राजनेता थे और हर मुद्दे पर अपनी राय खुलकर रखते थे। बड़े फैसले लेने से भी नहीं झिझकते थे।

वरिष्ठ पत्रकार वीर सांघवी ने अपनी हालिया किताब ‘अ रूड लाइफ: द मेम्योर’ में राजीव गांधी से अपनी एक मुलाकात का जिक्र किया है। एनडीटीवी ने इस किताब का Excerpt प्रकाशित किया है। वीर सांघवी लिखते हैं, ‘राजीव गांधी से जब मैंने ज्ञानी जैल को लेकर सवाल किया तो उन्होंने इस पर जवाब देना सही समझा। राजीव गांधी ने कहा था, ‘क्या आपको पता है कि वह पंजाब समस्या के दौरान कैसा खेल कर रहे थे? मेरे पास मां के हाथ से लिखे हुए कागजात भी हैं, इसमें मां ने लिखा है कि ज्ञानी असफल हुए हैं पंजाब में शांति लाने में।’

वीर सांघवी राजीव गांधी से हुई अपनी बातचीत का जिक्र करते हुए आगे लिखते हैं, ‘पंजाब के नेता बात करने के लिए दिल्ली आते थे और वापस लौटने पर उन्हें ज्ञानी जैल सिंह का कॉल आता था। वह उन्हें लालच देते थे कि इतने में सहमत मत होना, सरकार तुम्हें थोड़ा और देगी। इस बात की खबर लगने के बाद मेरी मां ने उन्हें पंजाब से संबंधित सभी कागजात भेजने बंद कर दिए और हमने भी ऐसा ही किया।

दरअसल, इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान पंजाब में उग्रवादी आंदोलन और खालिस्तान की मांग चरम पर थी। इंदिरा गांधी ने पंजाब की स्थिति पर काबू पाने के लिए ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ को हरी झंडी दे दी थी। ऑपरेशन ब्लू स्टार भारतीय सेना ने 3 से 6 जून 1984 को पंजाब के अमृतसर स्थित हरमंदिर साहिब परिसर को ख़ालिस्तान समर्थक जनरैल सिंह भिंडरावाले और उसके समर्थकों से मुक्त करवाने के लिए चलाया था। उस दौरान देश के राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ही थे। इस ऑपरेशन से सिख समुदाय काफी नाराज़ हो गया था। सरकार पर सिख विरोधी होने के आरोप लगते रहे थे।

राजीव गांधी की हत्या: आपको बता दें कि 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक बम धमाके में राजीव गांधी की हत्या कर दी गई थी। बीबीसी के मुताबिक इस दौरान पत्रकार नीना गोपाल भी वहां मौजूद थीं। नीना ने बताया था, ‘आम तौर पर मैं सफेद साड़ी नहीं पहनती थी, लेकिन उस दिन मैंने सफेद साड़ी पहनी और मौके पर पहुंच गई। लेकिन मेरी आंखों के सामने जोरदार धमाका हुआ। धमाका होने से पहले थोड़ी चर-चर की आवाज़ आई थी। फिर अचानक हुए धमाके में मेरी सफेद साड़ी काली हो गई।’

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक राशिद किदवई सोनिया गांधी की जीवनी ‘सोनिया: ए बायोग्राफी’ में लिखते हैं, ‘चेन्नई से दिल्ली फोन आया। फोन करने वाले वाला शख्स सोनिया गांधी या विंसेंट जॉर्ज (राजीव के निजी सचिव) से बात करना चाहता था। जॉर्ज ने फोन लिया और राजीव गांधी के बारे में पूछना चाहा, लेकिन सामने से कोई आवाज ही नहीं आई। जॉर्ज ने थोड़ी तेज आवाज में पूछा कि राजीव कैसे हैं? तुम बताते क्यों नहीं हो? दूसरी तरफ से आवाज़ आई, ‘सर, राजीव गांधी अब इस दुनिया में नहीं हैं और फोन कट गया।’



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