Wednesday, October 20, 2021

वो कोई युग निर्माता नहीं थे, लोग भूल चुके हैं- जब गांधी को लेकर बोले थे आंबेडकर

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भारतीय संविधान के निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले डॉ. भीम राव आंबेडकर का जन्म आज ही के दिन 14 अप्रैल 1891 को हुआ था। आंबेडकर ने बचपन से ही आर्थिक और सामाजिक भेदभाव का सामना किया था। जब वो बड़े हुए तब दलितों के उत्थान के लिए उन्होंने बहुत से काम किए। दलितों पर हो रहे अत्याचारों के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए उन्होंने जनता, बहिष्कृत भारत, मूक नायक जैसे साप्ताहिक पत्र निकाले। महात्मा गांधी भी उन दिनों दलितों और अछूतों के लिए काम कर रहे थे लेकिन फिर भी दोनों के बीच विचारों का गहरा मतभेद था।

जब आंबेडकर ने गांधी को बताया भारतीय इतिहास का महज़ एक हिस्सा- गांधी को भारत के अलावा पश्चिम देशों के लोग भी बड़ा सम्मान देते थे। हालांकि आंबेडकर इस बात से बिल्कुल इत्तेफाक नहीं रखते थे बल्कि वो गांधी को इतिहास का हिस्सा भर मानते थे। जब 1955 में बीबीसी ने गांधी के बारे में उनसे पूछा था तो उनका जवाब था, ‘मुझे इस बात पर हैरानी होती है कि पश्चिमी देश गांधी में इतनी दिलचस्पी क्यों लेते हैं। जहां तक भारत की बात है, वो देश के इतिहास का महज एक हिस्सा हैं, कोई युग निर्माण करने वाले नहीं। गांधी को लोग भूल चुके हैं।’

आंबेडकर के किताब प्रेम से सभी वाकिफ हैं। उनके पास किताबों की पूरी एक लाइब्रेरी होती थी। लेकिन बावजूद इसके वो किसी को पढ़ने के लिए किताब उधार नहीं देते थे। बीबीसी हिंदी की एक रिपोर्ट के मुताबिक – वो कहते थे कि अगर किसी को उनकी किताब पढ़नी है तो वो उनके पुस्तकालय में आए। किताबों के अलावा आंबेडकर के कई और शौक भी थे।

 

दिल्ली में सबसे सुंदर था बाबा साहेब का बगीचा, अंग्रेजी अखबार ने की थी तारीफ़- आंबेडकर को बागवानी का खासा शौक था। उनका बगीचा उन दिनों दिल्ली का सबसे सुंदर बगीचा माना जाता था। ब्रिटिश अखबार डेली मेल ने भी उनके बगीचे की खूब सराहना की थी।

जब अपने कुत्ते की मौत पर फूट- फूट कर रोए थे आंबेडकर- आंबेडकर को कुत्तों से गहरा लगाव था। वो हमेशा ही एक कुत्ता पालते थे। जब एक बार उनका पालतू कुत्ता मर गया तो वो खूब रोए थे।

 

आंबेडकर ने की थी दो शादियां – आंबेडकर की निजी जिंदगी भी काफी चर्चित रही। उनकी पहली शादी केवल 15 साल की उम्र में ही रमाबाई से हो गई थी। आंबेडकर अपनी पढ़ाई और काम में इतने व्यस्त रहते कि परिवार को वक्त नहीं दे पाते थे। पत्नी रमाबाई बीमार रहने लगीं तब भी वो उन्हें पर्याप्त वक्त नहीं देते थे। 1935 में रमाबाई बीमारी के कारण चल बसीं।

इसके 13 सालों बाद उन्होंने मुंबई की डॉक्टर सविता से विवाह कर लिया। सविता ब्राह्मण थीं और इस कारण कई लोग उनसे बेहद नाराज़ भी हुए थे। खुद उनके बेटे भी इस शादी से खुश नहीं थे। हालांकि आंबेडकर ने इन बातों पर ध्यान नहीं दियाय़






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