Thursday, October 21, 2021

सेहत भी शरबत भी

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मानस मनोहर
दुनिया का ऐसा कोई समाज नहीं, जहां अपने ढंग के पचीस-पचास तरह के शरबत न बनते हों। शरबत यानी मीठा पेय, गरमी से राहत देने वाला, पेट को दुरुस्त रखने और जबान का स्वाद बदलने वाला। शरबत से मेहमानों के स्वागत की परंपरा तो है ही, इसका औषधीय महत्व भी है। इसलिए सर्दियों से शरबत को लेकर तरह-तरह के प्रयोग भी होते रहे हैं।

आम पना
आम पना भी शुद्ध देसी शरबत है। इन दिनों कच्चा आम बहुतायत में उपलब्ध है। उसे भून या उबाल कर पना बना लें और पिएं, फिर देखें इसका आनंद। यों अब बाजार में बोतलबंद आम पना भी मिलता है, मगर उसमें वह आनंद कहां, जो घर में ताजा बने आम पना में होता है। यह तेज गरमी और लू का मौसम है। कहते हैं कि अगर आम पना पीकर घर से बाहर निकलो, तो लू नहीं लगती। लोगों ने प्राकृतिक प्रकोप से बचने के बहुत सारे नुस्खे निकाल रखे हैं, जिनमें खानपान के जरिए ही लू, शीतलहर आदि के प्रकोप से बचने का उपाय किया जाता रहा है। आम पना भी उन्हीं उपायों में एक है। यह लू से बचाव करता है। इसलिए गाय-भेड़-बकरियां चराने वाले चरवाहे आम के बगीचों में कच्चा आम भून कर उसका रस पी लिया करते हैं और पूरी दोपहरी खुले में अपने मवेशी चराया करते हैं। गांवों में आज भी इसी तरीके से आम पना बनाया जाता है- कच्चे आम को आग में भून कर उसके गूदे का शरबत बना लिया जाता है। मगर शहरों में आग में आम भूनने की सुविधा नहीं होती, इसलिए उसे उबाल कर भी पना बनाया जा सकता है।

आम पना बनाने के लिए चार सामान्य आकार के कच्चे आम लें। उनका छिलका उतार कर गूदे को अलग कर लें। बीज और गुठली भी फेंक दें। इस गूदे में एक गिलास पानी डाल कर कुकर या भगोने में आम के नरम होने तक उबाल लें। फिर उबले हुए आम को ठंडा होने दें।

अब उबले हुए आम को मिक्सर में डालें। उसमें एक कप चीनी, मुट्ठी भर पुदीने की पत्तियां, एक से डेढ़ चम्मच भुना जीरा, आधा चम्मच कुटी काली मिर्च, एक चम्मच सौंफ, एक चम्मच काला नमक डालें और मिक्सर में चला कर अच्छी तरह पीस लें।

इस मिश्रण को मोटी छन्नी से छान लें, ताकि उसमें बचा हुआ पुदीने का डंठल, सौंफ आदि अगर पिसने से रह गए हों तो उन्हें निकाला जा सके। आम पना तैयार है। इसमें से दो-तीन चम्मच मिश्रण एक गिलास में डालें और ठंडा पानी मिला कर घोलें, ऊपर से एक-दो पुदीने का पत्ता डाल कर परोसें। अगर चीनी से परहेज है, तो आम पना नमकीन भी बना कर पी सकते हैं। अपनी इच्छा के अनुसार काली मिर्च की मात्रा बढ़ा कर इसे तीखा भी रख सकते हैं।

इस मिश्रण को किसी शीशी में भर कर फ्रिज में रख सकते हैं। दो दिन के भीतर इसका इस्तेमाल कर लें, तो इसकी ताजगी बनी रहती है। इस गर्मी में हफ्ते में कम से कम एक दिन आम पना अवश्य पिएं। पाचन और शरीर की गर्मी से लड़ने की क्षमता दुरुस्त रहेगी। बाजार के बोतलबंद शरबत की अपेक्षा देसी ढंग के ये शरबत अधिक आनंद देते हैं।

बेल का शरबत
भारतीय परंपरा में बेल अत्यंत पवित्र वृक्ष माना जाता है। पूजा-पाठ में भी इसके पत्ते देवताओं को चढ़ाए जाते हैं। वैसे इसका फल मुख्य रूप से शरबत बनाने के ही काम आता है। पाचन संबंधी परेशानियों को दूर करने में यह शरबत काफी मददगार साबित होता है। इसलिए हफ्ते में एकाध बार तो अवश्य इसका शरबत पीना चाहिए।

इस मौसम में बेल का फल बाजार में बहुतायत में मिलता है। कई जगह शहरों में सड़कों के किनारे भी बेल का शरबत बेचने वाले मिल जाते हैं। आम पापड़ की तरह बेल का पापड़ भी पैकेट में उपलब्ध होता है। मगर बेल का ताजा बना शरबत पीने का आनंद ही कुछ और होता है। बेल का शरबत बनाना दूसरे शरबतों की तुलना में थोड़ा मशक्कत का काम जरूर है, पर इसे खुद बना कर पीने का सुख अलग ही होता है। बेल का शरबत बनाने से बहुत सारे लोग इसलिए बचते हैं कि इसका बीज और रेशा निकालना खासा मेहनत भरा काम होता है। मगर इससे घबराने की जरूरत नहीं। हर काम को आसान बनाने के कुछ नुस्खे होते हैं, उन्हें जान लें, तो परेशानी कम हो जाती है।

बेल का शरबत बनाने के लिए उसे तोड़ कर चम्मच की मदद से सारा गूदा अलग कर लें। उसी में छह-आठ चम्मच चीनी डालें और तीन-चार गिलास पानी डाल कर दस मिनट के लिए छोड़ दें। फिर उंगलियों से मसलते हुए गूदे को पानी में घोल लें। कुछ देर मसलते रहने से बेल के गूदे का रेशा और बीज अलग हो जाएंगे। उन्हें मुट्ठी में दबा कर निचोड़ें और अलग कर लें।

ध्यान रखें कि इस गूदे को कभी मिक्सर में न चलाएं, नहीं तो बेल का बीज फट कर शरबत को कड़वा कर देगा। जब भी बेल का शरबत बनाना हो, उसे हाथ से मसलते हुए ही बनाएं। यही देसी और सही तरीका है। अगर मोटे छेद वाली छन्नी है, तो उसमें छान कर इसके रेशे और बीज को अलग कर सकते हैं। फिर बीज निकालने के बाद अगर चाहें तो मिक्सर में डाल कर चला लें। इस तरह शरबत एकसार हो जाएगा।

अब इसमें दो-तीन नींबू का रस, एक चम्मच काला नमक, कुछ पुदीने की पत्तियां और अगर चीनी कुछ कम लग रही है, तो थोड़ी चीनी और डालें और अच्छी तरह मिलाएं। बेल का शरबत तैयार है। इसे ताजा-ताजा पीएं और पिलाएं, फिर देखें किस तरह यह न सिर्फ आपके पाचन को दुरुस्त करता है, बल्कि मन और मिजाज को भी तरोताजा कर देता है।

नोट : इस वक्त कोरोना का भय बना हुआ है, लिहाजा शरबत मेंं बर्फ डालने से बचें। वैसे भी देसी शरबत में बर्फ की जरूरत नहीं होती, उसे ठंडे पानी में बनाकर पीना ही काफी होता है।



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