Monday, October 18, 2021

हिम्मत मत टूटने दो, हौसला ना हारो

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नरपत दान चारण

किसी ने क्या खूब कहा है- ‘हौसले भी किसी हकीम से कम नहीं होते/हर तकलीफ में ताकत की दवा देते हैं।’ …या फिर ‘ख्वाब टूटे हैं मगर हौसले जिंदा हैं/हम वो हैं, जहां मुश्किलें शर्मिदा हैं।’ …और ये भी कि ‘हर रोज गिर कर भी मुकम्मल खड़े हैं/ ऐ जिंदगी देख, मेरे हौसले तुझसे भी बड़े हैं।

ये चंद शेर बताते हैं कि मुसीबतों के दौर में हिम्मत और हौसला कितना मायने रखता है। नेल्सन मंडेला ने कहा है- ‘मुझे यह लगता है कि डर का न होना हिम्मत नहीं है बल्कि डर पर विजय पाना हिम्मत है, बहादुर वह नहीं है जिसको भय नहीं होता है, बल्कि बहादुर वह है जो उस भय को मात दे दे।’ वहीं नेपोलियन बोनापार्ट कथन है -‘साहस सिर्फ आगे बढ़ने की शक्ति नहीं है बल्कि यह शक्ति न होने पर भी आगे बढ़ते जाना है’! आज के इस महामारी के दौर में जब मुसीबतें लगातार सामने आ रही हैं, तब हिम्मत और हौसले की जरूरत कहीं अधिक है।

बीमारी के बाद अनहोनी की आशंका भय, निराशा और तनाव पैदा कर रहा है। सबसे बडा कारण है, कोरोना के बाद एकांतवास में रहना। इस एकाकीपन में दिमाग में नकारात्मक विचार आते हंै, जो भीतर की ऊर्जा को कमजोर करते हैं। वहीं बीमारी के बाद अस्पताल, दवा, देखभाल आदि को लेकर भी बहुत मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में हमें अपनी तरह से जो भी बन पड़ रहा है, वह सहायता करनी चाहिए। यूं भी किसी परेशान को जब कोई कहता है कि आपकी क्या मदद कर सकता हूं, तो यह किसी दवा से कम काम नहीं करता। यह वाक्य पीड़ित के अंदर हौसला और हिम्मत पैदा करता है। जरा कल्पना कीजिए कि लिफ्ट नहीं है और आपको दसवीं मंजिल पर जाना है, सीढ़ियां हैं पर पैरों में तकलीफ है।

दफ्तर के लिए देर हो रही है, पर कोई साधन नहीं है। अचानक कोई पीछे से आकर कहता है। फिक्र क्यों करते हो, चलो मैं लेकर चलता हूं। कैसा लगेगा? अवश्य ही सुकून देने वाला। आज महामारी के तनाव भरे वातावरण में पीड़ित व्यक्ति मायूस और असहाय महसूस कर रहे हैं। और कुछ ऐसे भी हैं, जो किसी ना किसी अन्य कारण से परेशान हंै, उदास हैं, अकेले हैं, वे किसी ना किसी समाधान की तलाश में हैं, चाहे वे आपके माता-पिता हों या आपके मित्र। उन्हें संबल और हौसला चाहिए। और इसमें सबसे महत्वपूर्ण यह है कि ऐसे माहौल में आप उनकी मदद कैसे कर सकते हैं। हमारी ऐसी ही कई छोटी-छोटी बाते हैं, जो निराश या हताशा से घिरे व्यक्ति को हौसला दे सकती हैं।

चूंकि कोरोना बीमारी में अकेलेपन से निराशा और तनाव में घिरा व्यक्ति अपने आपको अकेला महसूस करता है। उसे लगता है कि वह किसी अंधेरी जगह में अकेले ही रास्ता तय कर रहा है। ऐसे में परिवार या दोस्तों के लिए उस व्यक्ति को यह एहसास दिलाना जरूरी है, कि वह इस समस्या को अकेले नहीं झेल रहा। सभी लोग उसके साथ हैं। इससे व्यक्ति में हिम्मत आती है और उसे लगता है की वह जल्द वापसी करेगा। मै हूं ना, ये तीन शब्द जादू का काम करते हैं।

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार किसी उदास या मुसीबत में फंसे व्यक्ति के लिए थोड़ा सा भी प्रयास करना उसे उम्मीद, हिम्मत और हौसला देता है। किसी के लिए दवा या टैक्सी का प्रबंध कर देना, किसी को भोजन देना, किसी को लिफ्ट दे देना, उनके लिए अपने किसी जानकार व्यक्ति से बात करना, उनके साथ डॉक्टर के पास जाना, उनके साथ समय बिताना आदि कई ऐसी छोटी बातें हैं, जो दूसरों के लिए आपके सोचे हुए से कहीं अधिक महत्व रखती हैं।

ऐसा भी कई बार होता है, जब स्थितियां नियंत्रण से बाहर होती हैं। आप लंबी बीमारी के कारण या फिर मानसिक रोग से गुजर रहे होते हैं। इसमें उसका खुद का कोई दोष नहीं है, यह बात रोगी को समझाना बहुत जरूरी होता है। ऐसा नहीं करने से उनकी समस्याएं और बढ़ जाती हैं क्योंकि खुद को दोषी मानकर वह हौसला और हिम्मत खो देता है। इस तरह जिंदगी में और भी अनेक समस्याएं हंै, जिनका दोषी व्यक्ति खुद को मानने लग जाता है। ऐसे कठिन पलों में आपका उन्हें यह एहसास दिलाना जरूरी है कि इसमें आपकी कोई गलती नहीं है। आपका ऐसा करना उनमें खुशी और जोश का संचार करता है। क्या आपको मदद चाहिए या मैं आपके लिए क्या कर सकता हूं, ऐसा पूछना दूसरे व्यक्ति की मदद करने का ही एक तरीका है।

परेशान व्यक्ति के साथ संवेदनात्मक, भावनात्मकयुक्त मानवीय व्यवहार करना, उनका हाल पूछना, उनके साथ हंसी-मजाक करना, उनकी पसंद की चीजें करना, निराशा में घिरे व्यक्ति को जीवन में संतुलन बनाने के लिए प्रेरित करता है।
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार किसी मुसीबत या लंबी बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति को उसकी सोच के साथ अकेले छोड़ देना उनकी मुश्किलों को बढ़ावा देने जैसा है। निराश व्यक्ति यदि खुद को कोस रहा है, तो आप उसे कहें कि ऐसे समय में ये विचार आते हैं। स्थिति इतनी बुरी नहीं है, कुछ बुरा नहीं होगा। हम आपके साथ हैं। बस आप भरोसा और हौसला रखें। सब ठीक होगा।



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