Thursday, October 28, 2021

Pregnancy में कम या ज्यादा वजन से हो सकता है मिसकैरेज, जानें कैसे मेंटेन करें हेल्दी वजन

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Pregnancy Tips: गर्भावस्था का समय महिला समेत पूरे परिवार के लिए खास होता है। साथ ही, जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। इस दौरान गर्भवती महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति अधिक सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि उनके जरिये ही गर्भ में पल रहे शिशु को पोषण मिलता है। हालांकि, गर्भवती महिलाओं के शरीर में कई बदलाव आते हैं। इस दौरान कई महिलाओं का वजन भी बढ़ जाता है। इस कारण से कई बार प्रेग्नेंट लेडीज वजन घटाने की कोशिश में लग जाती हैं। लेकिन हाल में हुए एक अध्ययन के मुताबिक प्रेग्नेंसी में वजन का बढ़ना और घटना दोनों ही खतरनाक हो सकता है। आइए जानते हैं –

क्या पता चला है: यूनिवर्सिटी ऑफ साउथैम्पटन के शोधकर्ताओं ने बताया है कि गर्भवती महिलाएं जिनका वजन जरूरत से कम या ज्यादा होता है, उनमें मिसकैरेज का खतरा होता है। उनका मानना है कि खराब जीवन शैली के कारण भी गर्भपात हो जाता है। इस शोध के रिजल्ट की बात करें तो ये पाया गया कि जिन गर्भवती महिलाओं का बॉडी मास इंडेक्स यानी बीएमआई 18.5 से कम या फिर 25 से 30 या इससे ज्यादा होता है, उन्हें मिसकैरेज का खतरा अधिक होता है।

प्रेग्नेंसी में कितना होना चाहिए वजन: स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि गर्भधारण के लिए कम से कम महिला का वजन 45 किलो होना चाहिए। इससे कम वजन होने पर गर्भवती महिला को अंडरवेट करार दिया जाता है। साथ ही, जिन महिलाओं का BMI गर्भावस्था से पहले 18.5 के करीब होता है, उन्हें प्रेग्नेंसी के दौरान कम से कम 11 से 16 किलो वजन बढ़ाना चाहिए।

कम वजन क्यों है खतरनाक: अंडरवेट महिलाओं में फोलेट और आयरन जैसे पोषक तत्वों की कमी हो जाती है जिससे मिसकैरेज का खतरा बढ़ता है। यही नहीं, इससे जल्दी प्रसव की संभावना भी रहती है। यही नहीं, इससे शिशु की सेहत भी प्रभावित होती है। उनमें डायबिटीज, हार्ट रोग, सेरेब्रल पाल्सी जैसी बीमारियों का खतरा रहता है।

ओवरवेट होने के जोखिम: वजन का ज्यादा बढ़ना भी गर्भवती महिलाओं के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इसके कारण होने वाली मां और बच्चों को कई स्वास्थ्य जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है। ज्यादा वजन के कारण सी-सेक्शन की संभावना रहती है। प्रेग्नेंट लेडीज में जेस्टेशनल डायबिटीज और हाइपरटेंशन का खतरा हो सकता है।

किन बातों का रखें ध्यान: प्रेग्नेंसी के दौरान पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करें। साथ ही, नाश्ते में प्रोटीन और फाइबर्स को अहमियत दें। डाइट में फॉलिक एसिड, विटामिन्स युक्त फूड्स खाएं। भरपूर पानी पीयें और जंक फूड के सेवन से बचें। साथ ही, नींद पूरी करें और शराब-सिगरेट का इस्तेमाल न करें।



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