Wednesday, October 20, 2021

Premature नवजात शिशु को स्तनपान कराते वक्त किन बातों का ध्यान रखें माएं? जानिये

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Tips on Breast Feeding: हर महिला के लिए मां बनना मुश्किल लेकिन सबसे खूबसूरत अनुभव होता है। खासतौर पर तब जब वह पहली बार मां बनने वाली होती हैं। हालांकि, इस दौरान महिलाओं को कई भ्रांतियों से भी जूझना पड़ता है। गर्भावस्था से जुड़ी बातों का पता तो फिर भी प्रेग्नेंट महिलाओं को होती है लेकिन उन्हें पोस्ट प्रेग्नेंसी व ब्रेस्ट फीडिंग से जुड़ी हर बात की जानकारी नहीं होती है। ऐसे में स्तनपान के दौरान छोटी सी दिक्कत भी नई माओं को परेशान कर देती है। आइए आज जानते हैं कि शिशु अगर समय से पहले हो जाए तो स्तनपान कराने वाली महिलाओं को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए –

प्रीमैच्योर बच्चों को लेकर सावधानी अधिक रखने की जरूरत होती है। आम बच्चों की तुलना में इन शिशुओं को ज्यादा देखभाल की आवश्यकता होती है। ब्रेस्ट मिल्क बच्चों को शुरुआती पोषण प्रदान करता है और उन्हें बीमारियों और इंफेक्शन के खतरे से दूर रखता है। बता दें कि शिशु के प्री-मैच्योर होने पर मां को डॉक्टर से सलाह जरूर ले लेना चाहिए। साथ ही सभी जरूरी जानकारी प्राप्त करें।

प्री-मैच्योर बच्चों को कैसे फीड करें: स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि किसी भी शिशु को फीड करने की प्रक्रिया जेस्टेशन काल पर निर्भर करता है। इसके अनुसार ही फीडिंग प्रोसीजर प्रभावित होती है। लेकिन जिन बच्चों का जन्म समय से पहले हुआ है, उनकी माओं को कुछ बातों का ख्याल रखना चाहिए –

स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि इन महिलाओं को बच्चों को फीड करने से पहले ही ब्रेस्ट मिल्क पंप कर लेना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार भी महिलाओं को जन्म के 1 घंटे के अंदर बच्चों को स्तनपान कराना चाहिए। इस पंप किये हुए दूध को मां बच्चे को फीडिंग ट्यूब के जरिये कम से कम 8 बार पिलाना चाहिए।

किसी लैक्टेशन कंसल्टेंट से संपर्क करें, दूध निकालने के लिए सही जानकारी का होना आवश्यक है, ब्रेस्ट पंप का इस्तेमाल ठीक से करें। प्री-मैच्योर शिशु का वजन कम हो सकता है। साथ ही, उन्हें चूसने या निगलने में दिक्कत हो सकती है। इसलिए ही ब्रेस्ट पंप का इस्तेमाल करना चाहिए।

कब ब्रेस्ट से कराएं फीड: एक्सपर्ट्स के अनुसार जब शिशु के 34 सप्ताह शुरू हो जाएं तब उन्हें डाइरेक्टली फीड कराएं। जब तक बच्चों में इसकी आदत न बन जाए तब तक ठीक से सिखाएं। साथ ही, शुरुआत में मां को शिशु से स्किन टू स्किन कॉन्टैक्ट स्थापित करना चाहिए।



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